मेरा प्रश्न मेरी छोटी बेटी के खाने के बारे में है। मेरी बेटी एक साल की है।
तीन दिन पहले उसे उल्टियां हुई थीं। हमने तुरंत डॉक्टर को दिखाया, और उन्होंने दवा दी। दवा से अब उल्टी बंद हो गई है, और उसकी तबीयत भी अच्छी लगती है।
पर अब परेशानी यह है कि वह कुछ भी खाने को तैयार नहीं है। खाना देने पर मुंह फेर लेती है। इतनी छोटी उम्र में बच्चा न खाए तो मां के रूप में मुझे बहुत चिंता होती है कि उसे कमज़ोरी आ जाएगी या वज़न घट जाएगा।
घर में हर व्यक्ति अलग सलाह देता है: कोई कहता है ज़बरदस्ती खिलाओ, कोई कहता है कुछ दिन इंतज़ार करो। मुझे समझ नहीं आता कि सही क्या है।
मेरे प्रश्न ये हैं:
– उल्टी के बाद बच्चे को खाने में अरुचि होना सामान्य है?
– ऐसे समय उसे कैसा और कितना भोजन दें?
– पानी और तरल पदार्थ कैसे दें?
– ज़बरदस्ती खिलाना सही है?
– भूख धीरे-धीरे वापस लाने के लिए आयुर्वेद में कोई सुरक्षित घरेलू उपाय है?
– कौन से लक्षण दिखें तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं?
मैं अपनी बेटी के स्वास्थ्य में कोई गलती नहीं करना चाहती, और उसे धीरे-धीरे फिर से अच्छे से खाते हुए देखना चाहती हूं। आपकी सरल और सुरक्षित सलाह बहुत उपयोगी होगी। ऐसे समय मां के रूप में मुझे कितना धैर्य रखना चाहिए और कब चिंता करनी चाहिए, यह भी समझाइए।
नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
सीधा उत्तर: उल्टी या पेट के इन्फेक्शन के बाद कुछ दिन बच्चे की भूख कम रहना सामान्य है, क्योंकि पाचन तंत्र धीरे-धीरे फिर से स्वस्थ होता है। इस समय ज़बरदस्ती खिलाने के बजाय पर्याप्त तरल और हल्का भोजन थोड़ा-थोड़ा देना सबसे महत्वपूर्ण है। ज़्यादातर बच्चों की भूख कुछ दिनों में वापस आ जाती है।
समस्या की समझ
उल्टी के बाद बच्चे का पेट कमज़ोर होता है और कभी शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। भोजन से पहले तरल ज़्यादा महत्वपूर्ण है। गीले डायपर गिनना पानी की पर्याप्त मात्रा जानने का आसान तरीका है।
आयुर्वेद की दृष्टि
आयुर्वेद के अनुसार उल्टी के बाद अग्नि (पाचन शक्ति) मंद हो जाती है, और इसे धीरे-धीरे बढ़ाने के लिए लघु (हल्का) और सुपाच्य आहार, जिसे पेया या यवागू (पतली कांजी) कहा जाता है, देने की सलाह है। इस क्रम को संसर्जन क्रम कहा जाता है: पहले पतला, फिर धीरे-धीरे गाढ़ा भोजन।
व्यावहारिक उपाय
- मां का दूध चल रहा हो तो बार-बार दें।
- थोड़ा-थोड़ा पानी, ORS (डॉक्टर की सलाह के अनुसार), पतला दाल का पानी या चावल का मांड।
- फिर मूंग की पतली खिचड़ी, उबला सेब, केला, दाल-चावल थोड़ा-थोड़ा।
- दिन में 5-6 बार छोटी मात्रा में; ज़बरदस्ती नहीं।
- बिस्किट, जूस, मीठे पेय और बाहर का भोजन न दें।
- खिलाते समय शांत और खुशनुमा माहौल; मोबाइल दिखाकर न खिलाएं।
औषधि
बच्चों के लिए कोई भी भूख बढ़ाने वाली या पाचक आयुर्वेदिक दवा उम्र और वज़न देखकर ही दी जाती है। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति जांचने के बाद वैद्य तय करेंगे। घर पर खुद चूर्ण या घुट्टी न दें।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
- 6-8 घंटे तक पेशाब न होना, मुंह सूखना, रोते समय आंसू न आना
- उल्टी फिर शुरू होना, मल में खून
- बहुत सुस्ती, बुखार, तालू धंस जाना
- एक सप्ताह बाद भी खाना बिल्कुल न बढ़े, वज़न घटे
संबंधित प्रश्न
उल्टी के बाद बच्चे को दूध दे सकते हैं?
मां का दूध जारी रखें; दूसरा दूध डॉक्टर की सलाह के अनुसार।
भूख वापस आने में कितने दिन लगते हैं?
आमतौर पर कुछ दिन से एक सप्ताह; बच्चे के अनुसार फर्क होता है।
संसर्जन क्रम क्या है?
आयुर्वेद में बीमारी के बाद पतले से गाढ़े भोजन की ओर धीरे-धीरे बढ़ने का तरीका।
संक्षेप में: उल्टी के बाद कुछ दिन बच्चे की भूख कम रहना सामान्य है। ज़बरदस्ती करने के बजाय मां का दूध, तरल, ORS और चावल का मांड-खिचड़ी जैसा हल्का भोजन थोड़ा-थोड़ा दें; पेशाब कम हो या सुस्ती हो तो तुरंत डॉक्टर।
आप बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सलाह ले सकते हैं।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
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