मुझे कई सालों से प्लूरिसी की तकलीफ है। डॉक्टर की दवा चलती रहे तब तक ठीक रहता है, पर दवा बंद होते ही फिर तकलीफ शुरू हो जाती है। मुझे लगातार सर्दी रहती है, पीला कफ निकलता है, सांस लेने में कठिनाई होती है और बाएं फेफड़े की तरफ बहुत दर्द होता है।
मैंने सुना है कि इस तकलीफ में फेफड़े के आसपास पानी भर जाता है। यह रोग स्थायी रूप से कम हो इसके लिए आयुर्वेद में क्या उपाय है? आहार और दिनचर्या में क्या ध्यान रखें?
नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
सीधा उत्तर: प्लूरिसी यानी फेफड़े को ढकने वाली परत (प्लूरा) में सूजन, कभी साथ में पानी भरना। बार-बार हो तो इसका मूल कारण, जैसे पुराना संक्रमण या टीबी, ढूंढना बहुत ज़रूरी है। आयुर्वेदिक इलाज डॉक्टर की जांच और इलाज के साथ सहायक के रूप में उपयोगी है।
समस्या की समझ
प्लूरा फेफड़े का बाहरी पतला आवरण है। इसमें सूजन आने पर सांस लेते समय सीने में चुभने वाला दर्द होता है। पीला कफ, बार-बार सर्दी और सांस फूलना साथ हो तो फेफड़े में चल रहे संक्रमण की संभावना जांचनी पड़ती है। भारत में बार-बार होने वाली प्लूरिसी में टीबी की जांच खास ज़रूरी है।
आयुर्वेद की दृष्टि
आयुर्वेद में बगल में होने वाले चुभने वाले दर्द को पार्श्व शूल कहते हैं, और कफ के साथ सांस की तकलीफ को कास-श्वास में समझाया गया है। कफ श्वास मार्ग रोकता है और वात दर्द तथा सांस की तकलीफ बढ़ाता है। इलाज में कफ-वात शमन, अग्नि सुधार और फेफड़ों का बल बढ़ाना (रसायन) महत्वपूर्ण है।
व्यावहारिक उपाय
- सीने का एक्स-रे, बलगम की जांच और डॉक्टर कहें तो टीबी जांच।
- डॉक्टर की दी दवा का पूरा कोर्स लें; बीच में बंद न करें।
- गरम पानी की भाप, गुनगुना पानी पीना।
- धूम्रपान और धुएं वाले माहौल से दूर।
आहार
- हल्का, गरम भोजन: मूंग की दाल, खिचड़ी, सब्ज़ी का सूप, सोंठ-हल्दी वाला दूध (पचे तो)।
- ठंडा, दही, आइसक्रीम, तला, भारी मिठाई कम।
औषधि, योग और पंचकर्म
आयुर्वेद में पुष्करमूल, वासा (अडूसा), कंटकारी, पिप्पली, सितोपलादि चूर्ण और च्यवनप्राश जैसे द्रव्य कफ-वात शमन और फेफड़ों के बल के लिए उपयोगी माने जाते हैं। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति की जांच के बाद वैद्य तय करेंगे। बुखार या तीव्र संक्रमण हो तब पहले डॉक्टर का इलाज। स्वस्थ समय में अनुलोम-विलोम, गहरी सांस का अभ्यास और वैद्य की सलाह से सीने पर स्नेहन-स्वेदन उपयोगी।
तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएं?
- बहुत सांस फूलना, होंठ नीले
- कफ में खून
- बुखार, रात को पसीना, वज़न घटना
- सीने में अचानक तीव्र दर्द
संबंधित प्रश्न
क्या प्लूरिसी संक्रामक है?
प्लूरिसी खुद नहीं, पर उसका कारण (जैसे टीबी) संक्रामक हो सकता है; जांच ज़रूरी।
बार-बार प्लूरिसी क्यों होती है?
अधूरा इलाज, पुराना संक्रमण या फेफड़ों की कोई दूसरी तकलीफ कारण हो सकती है।
क्या च्यवनप्राश फेफड़ों के लिए उपयोगी है?
आयुर्वेद में इसे रसायन माना जाता है; शुगर हो तो वैद्य की सलाह से लें।
संक्षेप में: प्लूरिसी यानी फेफड़े के आवरण में सूजन। बार-बार हो तो एक्स-रे, बलगम और टीबी की जांच ज़रूरी है। डॉक्टर के इलाज के साथ कफ-वात शामक आयुर्वेदिक औषधि, गरम हल्का आहार और प्राणायाम सहायक हैं।
आप रिपोर्ट के साथ प्रत्यक्ष या ऑनलाइन सलाह ले सकते हैं।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

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