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कब्ज की समस्या में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए विस्तार से बताएं- इसमें क्या आहार लेना चाहिए?

8.12K viewsआहार और परहेजपाचनतंत्र के रोगोabdominal problem Ayurveda Ayurveda Clinic Ayurveda Consulting ayurveda diet Ayurveda doctor Ayurveda Guidance Ayurveda Health tips ayurveda medicine ayurveda medicines Ayurveda QA ayurveda tips Ayurveda treatment basti karma constipation diet digestive problem dr ayurveda Dr. Nikul Patel kabj kee samasya kayam churna pet saaf hona अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक अपच आयुर्वेद आयुर्वेद आहार आयुर्वेद उपचार आयुर्वेद कन्स्ल्टींग आयुर्वेद क्लिनिक आयुर्वेद चिकित्सक आयुर्वेद दैनिक स्वास्थ्य आयुर्वेद भोजन आयुर्वेद युक्तियाँ आयुर्वेद समस्या आयुर्वेद सलाहकार आयुर्वेद स्वास्थ्य उपचार आहार आहार नियम आहार विधि ऑनलाइन आयुर्वेद परामर्श कब्ज परहेज़ पेट के रोग प्राणायाम बस्तीकर्म योगासन लाइफकेयर आयुर्वेद लाइफकेयर आयुर्वेद प्रश्नोत्तरी विरेचन कर्म वैद्य निकुल पटेल

कब्ज की समस्या काफी समय से है। और कायम चूर्ण से लेकर बाजार की कई तरह की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते थे। लेकिन कहीं भी सही समाधान नही मिल रहा है…तो सही उपाय दिखाओ।

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नमस्ते

आपका दिन स्वस्थ रहे !!

डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।

कब्ज़ सामान्यतः आहार और विहार की बुरी आदतों से होती है। इसकी ठीक योजना बनाकर ध्यान रखें तो अधिकतर कभी कठिनाई नहीं होती। ज़रूरत हो तब त्रिफला, हरड़, एरंड-भृष्ट हरीतकी चूर्ण या दीनदयाल चूर्ण का उपयोग कर सकते हैं।

पर बाज़ार में मिलने वाले “कायम चूर्ण” और उस जैसे दूसरे चूर्ण या गोलियाँ हमेशा की आदत लगा देते हैं। समस्या अधिक हो तो उचित उपचार लेकर समाधान किया जा सकता है।

कब्ज़ के रोगी को आहार-विहार की योजना इस प्रकार बनानी चाहिए।

निम्न में से अनुकूल आहार लें:

अजवाइन, उड़द, अचार, अदरक (अधिक), इमली, अंगूर, अंजीर, ककड़ी, काली किशमिश (अधिक), आम, कोकम, हरा धनिया, पत्तागोभी, फूलगोभी, कद्दू, खजूर, खट्टे पेय, चीनी, खिचड़ी, तोरई, गाजर, गाय का दूध (अधिक), गुड़, गेहूँ, घी, चीकू, जीरा, ज्वार, टमाटर, खरबूजा, तिल, तिल का तेल, चौलाई (अधिक), तुअर, गिलकी, दाल, अरंडी का तेल (अधिक), दूध, दूध का काढ़ा, लौकी, धनिया, पपीता (अधिक), परवल, पान, पापड़, पालक, दलिया/थूली (अधिक), भाखरी, चावल, भिंडी, मूँग, मक्खन, मिठाई (थोड़ी), नमक, कोमल मूली, राई, बैंगन, गरम रोटी, लहसुन (अधिक), नींबू, मटर (थोड़े), वाल (थोड़े), शकरकंद, गन्ने का रस, सहजन, हल्दी, हींग (अधिक) आदि।

निम्न विहार हितकारी है: चलना, परिश्रम, मालिश (पेट पर अरंडी के तेल से), ज़रूरत पर विरेचन, व्यायाम (आसन, खेल आदि), स्नान, तैराकी, और स्वेदन (अरंडी का तेल लगे आक के पत्ते पेट पर बाँधकर ऊपर से भाप का सेंक)।

निम्न आहार न लें:

कढ़ी, कोदरी, केला, ग्वार, चना, चावल (मुख्य भोजन के रूप में), छाछ (खास), अमरूद, ठंडे पेय, तला हुआ, दही (खास), संतरा, पाव, पापड़ी, फ्रिज का पानी, फलों का जूस, फ्रूट सलाद, बकरी का दूध, आलू, बर्फ़, बाजरा (खास), बिस्किट (खास), मक्का-भुट्टा, मूँगफली, मसूर, मेथी दाना, मेथी की भाजी, बासी भोजन, श्रीखंड, सिंघाड़ा, सेब, सोंठ आदि।

निम्न विहार से बचें: अति मैथुन, अति उपवास, रात्रि जागरण, दिन में सोना और अधिक यात्रा।

मात्रा बस्ति लेने की विधि: सर्जिकल-मेडिकल स्टोर से 10 मिली की डिस्पोज़ेबल सिरिंज और 10 नंबर का रबर कैथेटर लें। 5 मिली हल्का गर्म अरंडी का तेल लेकर उसमें थोड़ी हींग, संचल या सेंधा नमक डालें। रोगी को बाईं करवट लिटाएँ, बायाँ पैर सीधा और दायाँ पैर कूल्हे की ओर मोड़कर, जानकार व्यक्ति से गुदा में मात्रा बस्ति दिलवाएँ। सिरिंज और कैथेटर ठीक होने चाहिए और बस्ति हल्के हाथ से एक समान दबाव से दें। यह न जमे तो नज़दीक के पंचकर्म केंद्र पर जाकर मात्रा बस्ति लें।

नोट:

यहाँ दी गई सलाह सुरक्षा और हर जगह उपलब्धता के आधार पर दी गई है। हालाँकि, परिणाम दवा बनाने वाली कंपनी की गुणवत्ता पर निर्भर कर सकता है।

हमारे पास अच्छी गुणवत्ता की दवाएँ भी उपलब्ध हैं। हम दवाएँ गैर-व्यावसायिक आधार पर बनाते हैं और केवल अपने क्लिनिक से ही भेजते हैं। कोई भी व्यक्ति हमारे यहाँ से शुद्ध दवाएँ ले जा सकता है या कूरियर द्वारा दुनिया भर में मँगवा सकता है (कूरियर शुल्क अलग)। ऑनलाइन परामर्श द्वारा दवा पाने के लिए ईमेल या व्हाट्सएप मैसेज करें।

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वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
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अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
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महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।
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