नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
आपने पूछा है कि कड़वा रस हमारे लिए कैसे उपयोगी है और इसके क्या लाभ हैं।
सामान्य व्यवहार में कड़वा स्वाद किसी को पसंद नहीं। आयुर्वेद भी कहता है कि कड़वा रस किसी को अच्छा नहीं लगता – यह अरुचिकर है। फिर भी हम बच्चों को कड़वाहट देने का आग्रह रखते हैं, और समझते हैं कि बीमार लोगों को कड़वी दवा लेनी चाहिए।
लेकिन आयुर्वेद के अनुसार हर स्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए छह रस – तीखा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, मीठा और कसैला – सभी लेने चाहिए।
हर स्वस्थ व्यक्ति कड़वे द्रव्य ले सकता है। पित्त प्रकृति वालों और कफ-पित्त के रोगों, मधुमेह, बुखार, कृमि, रक्त विकार, एसिडिटी और जलन में कड़वा रस बहुत लाभकारी है। शरद और ग्रीष्म ऋतु में लेने पर यह रक्त की गर्मी घटाता है, कफ में लाभ करता है, पाचन सुधारता है और शरीर में स्फूर्ति रखता है।
कड़वा रस अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इसका एक गुण शरीर को कृश करना (वज़न घटाना) है; यह यौन शक्ति और नींद भी घटाता है।
कड़वी औषधियों में गुडूची (गिलोय) अपवाद है – कड़वी होने पर भी पौष्टिक है, इसलिए इसे कटु-पौष्टिक कहते हैं। उचित मात्रा में यह सामान्यतः सुरक्षित है, इसलिए नियमित कड़वा द्रव्य लेना हो तो गिलोय याद रखें – पर मधुमेह की दवा चल रही हो या ऑटोइम्यून रोग हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
नोट:
यहाँ दी गई सलाह सुरक्षा और हर जगह उपलब्धता के आधार पर दी गई है। हालाँकि, परिणाम दवा बनाने वाली कंपनी की गुणवत्ता पर निर्भर कर सकता है।
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वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
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