Skip to content

लंबे समय से बवासीर (पाइल्स) की तकलीफ, आयुर्वेदिक उपाय क्या है?

मुझे लंबे समय से बवासीर की तकलीफ है। मल त्याग के समय दर्द और जलन होती है, कभी थोड़ा खून भी आता है। कब्ज़ बार-बार रहती है और लंबे समय बैठकर काम करना पड़ता है। मरहम लगाने से थोड़ा आराम मिलता है, पर तकलीफ फिर लौट आती है। ऑपरेशन के बिना आयुर्वेद में कौन सा सही उपाय है? आहार और दिनचर्या में क्या बदलाव करें?

admin Changed status to publish

नमस्ते

आपका दिन स्वस्थ रहे !!

डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।

सीधा उत्तर: बवासीर में मुख्य कारण ज़्यादातर पुरानी कब्ज़ और मल त्याग के समय ज़ोर लगाना होता है। फाइबर वाला आहार, पर्याप्त पानी, मल नरम रखना और आयुर्वेदिक इलाज से कई लोगों को अच्छा आराम मिलता है। खून आता हो तो एक बार डॉक्टर की जांच ज़रूरी है।

समस्या की समझ

मलद्वार की नसों में सूजन आने से बवासीर होती है। ज़ोर लगाना, लंबे समय तक टॉयलेट में बैठना, बैठा हुआ जीवन, ज़्यादा वज़न और गर्भावस्था जोखिम बढ़ाते हैं। खून सिर्फ बवासीर से ही आए ऐसा नहीं; फिशर या कोई दूसरी तकलीफ भी हो सकती है।

आयुर्वेद की दृष्टि

आयुर्वेद में बवासीर को अर्श कहते हैं। चरक संहिता इसका मूल अग्निमांद्य (कमज़ोर पाचन) मानती है। वात बढ़ने से कब्ज़ और दर्द, पित्त बढ़ने से जलन और खून, और कफ बढ़ने से सूजन और चिपचिपाहट। इलाज में अग्नि सुधार और वात अनुलोमन (वायु की नीचे की दिशा में सही गति) मुख्य है। आयुर्वेद में क्षारसूत्र और क्षारकर्म जैसी विशेष चिकित्सा भी बताई गई है।

व्यावहारिक उपाय

  • मल त्याग के समय ज़ोर न लगाएं; 5 मिनट से ज़्यादा न बैठें, मोबाइल के साथ नहीं।
  • गुनगुने पानी में बैठना (सिट्ज़ बाथ), दिन में 1-2 बार 10 मिनट।
  • लंबे समय बैठना हो तो हर घंटे उठकर चलें।
  • रोज़ टहलना, वज़न नियंत्रण।

आहार

  • रोज़ 8-10 गिलास पानी; छाछ (दिन में), सब्ज़ियां, फल, इसबगोल, साबुत अनाज।
  • घी संतुलित मात्रा में (मल नरम रखता है)।
  • तीखा, तला, मैदा, ज़्यादा चाय-कॉफी, शराब कम; देर रात भारी भोजन नहीं।

औषधि और पंचकर्म

आयुर्वेद में त्रिफला, हरड़, अभयारिष्ट, कांकायन वटी, नागकेसर (खून आने पर) जैसे द्रव्य अर्श में उपयोगी माने जाते हैं। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति की जांच के बाद वैद्य तय करेंगे। बड़े या बाहर आने वाले मस्सों में क्षारसूत्र-क्षारकर्म विशेषज्ञ की देखरेख में विचार किया जा सकता है।

तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएं?

  • ज़्यादा मात्रा में खून, चक्कर, कमज़ोरी
  • काला मल, वज़न घटना, मल त्याग की आदत में लंबा बदलाव
  • मस्सा बाहर आकर अंदर न जाए, तीव्र दर्द
  • 40 साल के बाद पहली बार खून आना

संबंधित प्रश्न

क्षारसूत्र क्या है?

आयुर्वेद की औषधीय धागे द्वारा होने वाली विशेष चिकित्सा, जो विशेषज्ञ ही करते हैं।

बवासीर और फिशर में क्या अंतर है?

बवासीर नसों की सूजन है; फिशर मलद्वार में चीरा है, जिसमें तीव्र दर्द होता है।

बवासीर में कौन सा आहार न लें?

तीखा, तला, मैदा और कम पानी; फाइबर और पानी बढ़ाएं।

संक्षेप में: बवासीर (अर्श) का मुख्य कारण पुरानी कब्ज़ और ज़ोर लगाना है। फाइबर वाला आहार, पर्याप्त पानी, सिट्ज़ बाथ, त्रिफला जैसी आयुर्वेदिक देखभाल और ज़रूरत हो तो क्षारसूत्र से ऑपरेशन के बिना बहुत आराम मिल सकता है।

आप प्रत्यक्ष जांच के लिए सलाह ले सकते हैं।


VN

वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
Atharva Ayurveda Clinic Logo
अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
📍 क्लिनिक का Location — Google Maps

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।
admin Changed status to publish
You are viewing 1 out of 1 answers, click here to view all answers.
Back to top