Skip to content

सालों पुरानी मुंह की दुर्गंध, दांत साफ कराने पर भी फर्क नहीं (24 वर्ष)

मैं 24 साल का हूं। कई सालों से मेरे मुंह से बहुत दुर्गंध आती है और मुंह चिपचिपा रहता है। दांतों के डॉक्टर से कई बार दांत साफ कराए और कई दवाएं भी लीं, पर कोई फर्क नहीं पड़ा। दुर्गंध न आए इसके लिए मुझे मुंह में लगातार कुछ रखना पड़ता है।

अब शादी की बात चल रही है, और लोगों से मिलते समय मुझे बहुत संकोच और बेचैनी होती है। इस तकलीफ का सही कारण क्या हो सकता है, और आयुर्वेद में इसका सही उपाय क्या है? ज़रूरत हो तो प्रत्यक्ष इलाज के लिए भी तैयार हूं।

admin Changed status to publish

नमस्ते

आपका दिन स्वस्थ रहे !!

डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।

सीधा उत्तर: शुगर 320 ऊंचा स्तर है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से पूरी जांच और ज़रूरी इलाज शुरू करना ज़रूरी है। आयुर्वेदिक इलाज, आहार और व्यायाम उसके साथ बहुत उपयोगी सहायक बनते हैं, और कई लोगों में शुगर नियंत्रण सुधरता है। डॉक्टर की दवा खुद बंद न करें।

समस्या की समझ

बार-बार प्यास, बार-बार पेशाब और ऊंची शुगर डायबिटीज़ के लक्षण हैं। पारिवारिक इतिहास हो तो जोखिम ज़्यादा होता है। लंबे समय तक ऊंची शुगर आंख, किडनी, नसों, हृदय और पैरों पर असर कर सकती है, इसलिए समय पर नियंत्रण बहुत महत्वपूर्ण है।

आयुर्वेद की दृष्टि

आयुर्वेद में डायबिटीज़ को मधुमेह (प्रमेह का एक प्रकार) कहा गया है। चरक संहिता इसके कारणों में बैठा हुआ जीवन, ज़्यादा नींद, दूध-दही-गुड़-मिठाई जैसे भारी, कफ बढ़ाने वाले भोजन की अधिकता बताती है। कफ और मेद (चर्बी) बढ़ने से शरीर के स्रोत रुकते हैं, और फिर वात भी बढ़ता है। वंशानुगत (सहज) मधुमेह को आयुर्वेद ज़्यादा सावधानी वाला मानता है।

व्यावहारिक उपाय

  • डॉक्टर से HbA1c, किडनी, लिपिड, आंख की जांच।
  • घर पर नियमित शुगर जांच और नोट।
  • रोज़ 45 मिनट तेज़ चलना, हफ्ते में कम से कम 5 दिन।
  • वज़न ज़्यादा हो तो धीरे-धीरे घटाएं।
  • पैरों की रोज़ जांच; घाव या छाला हो तो तुरंत दिखाएं।

आहार

  • जौ, बाजरा, ज्वार, मूंग, कड़वी-कसैली सब्ज़ियां (करेला, मेथी, परवल), हरी सब्ज़ियां।
  • मिठाई, गुड़, चीनी, मैदा, ठंडे पेय, ज़्यादा चावल और आलू कम।
  • रात को हल्का भोजन; दिन में नींद नहीं।

औषधि, योग और पंचकर्म

आयुर्वेद में गुड़मार, मामेजवो, जामुन की गुठली, हल्दी-आंवला जैसे द्रव्य प्रमेह में उपयोगी माने जाते हैं। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति की जांच के बाद वैद्य तय करेंगे। डॉक्टर की दवा चल रही हो तो आयुर्वेदिक दवा के साथ लेने पर शुगर ज़्यादा घट सकती है, इसलिए दोनों को बताकर ही लें। योग: सूर्य नमस्कार, मंडूकासन, अर्ध मत्स्येंद्रासन, कपालभाति (BP या हृदय रोग हो तो सलाह से)। वैद्य जांच के बाद विरेचन जैसा शोधन भी सुझा सकते हैं।

तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएं?

  • शुगर लगातार 300 से ज़्यादा, या बहुत कम (चक्कर, पसीना, कंपकंपी)
  • उल्टी, पेट दर्द, बहुत थकान, भ्रम
  • पैर में घाव जो न भरे, झनझनाहट
  • धुंधला दिखना, सीने में दर्द

संबंधित प्रश्न

क्या आयुर्वेदिक दवा के साथ डायबिटीज़ की दवा ले सकते हैं?

अक्सर हां, पर शुगर ज़्यादा घटने के जोखिम के कारण दोनों डॉक्टरों को बताकर और नियमित जांच के साथ।

डायबिटीज़ में कौन सा अनाज अच्छा है?

जौ, बाजरा, ज्वार और साबुत अनाज, संतुलित मात्रा में।

परिवार में डायबिटीज़ हो तो बच्चे क्या करें?

नियमित व्यायाम, सही वज़न और 30 साल के बाद समय-समय पर शुगर जांच।

संक्षेप में: शुगर 320 ऊंचा स्तर है, इसलिए डॉक्टर की जांच और इलाज तुरंत ज़रूरी है। आयुर्वेद में इसे मधुमेह कहते हैं; जौ-बाजरा जैसा आहार, रोज़ चलना, वज़न नियंत्रण और वैद्य की सलाह से औषधि सहायक बनती है।

आप रिपोर्ट के साथ प्रत्यक्ष या ऑनलाइन सलाह ले सकते हैं।


VN

वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
Atharva Ayurveda Clinic Logo
अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
📍 क्लिनिक का Location — Google Maps

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।
admin Changed status to publish
You are viewing 1 out of 1 answers, click here to view all answers.
Back to top