मेरा प्रश्न बार-बार होने वाले दाद के बारे में है। मुझे बहुत समय से दाद की तकलीफ है, और यह पूरी तरह ठीक होता ही नहीं।
जब तक मैं दवा लेता हूं, खुजली बंद रहती है और दाद शांत लगता है। पर जैसे ही दवा बंद करता हूं, कुछ ही दिनों में फिर से खुजली शुरू हो जाती है और दाद वापस दिखने लगता है। यह चक्र बार-बार चलता है, और अब मैं थक गया हूं।
खुजली के कारण कभी-कभी नींद और रोज़ के काम में भी रुकावट आती है, और लोगों के बीच खुजलाने में शर्म आती है। मन में प्रश्न होता है कि क्या मेरी दवा सही नहीं है, या मैं कोई गलती कर रहा हूं जिसके कारण दाद वापस आता है।
मुझे ये बातें समझनी हैं:
– दवा बंद करते ही दाद क्यों वापस आता है?
– दाद बार-बार होने के आम कारण क्या हैं?
– कपड़े, तौलिया, पसीना और स्वच्छता में क्या ध्यान रखें?
– घर के दूसरे सदस्यों में यह न फैले, इसके लिए क्या करें?
– आयुर्वेद में दाद हमेशा के लिए ठीक करने का कौन सा उपाय है?
– भोजन में कोई परहेज़ ज़रूरी है?
– कब त्वचा के डॉक्टर की जांच ज़रूरी है?
मैं इस बार-बार के चक्र से बाहर निकलना चाहता हूं, और दवा के साथ अपनी आदतों में ज़रूरी बदलाव करने को भी तैयार हूं। आपकी व्यावहारिक सलाह बहुत उपयोगी होगी। धन्यवाद।
नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
सीधा उत्तर: दाद (फंगल इन्फेक्शन) बार-बार वापस आने के मुख्य कारण हैं: खुजली बंद होते ही इलाज बीच में छोड़ देना, नमी, तंग कपड़े, कपड़ों-तौलिए में फंगस रह जाना, और घर में दूसरों को भी संक्रमण होना। पूरे इलाज, स्वच्छता और आयुर्वेदिक रक्त शोधन देखभाल से कई लोगों को लंबी राहत मिलती है।
समस्या की समझ
खुजली बंद होने पर भी त्वचा में फंगस बचा रह सकता है। इसलिए डॉक्टर जितना कहें उतना पूरा कोर्स ज़रूरी है, अक्सर दाग जाने के बाद भी कुछ सप्ताह। कुछ लोग स्टेरॉयड वाली क्रीम खुद लगाते हैं, जो थोड़े समय राहत देती है पर फंगस को और फैलाती है।
आयुर्वेद की दृष्टि
आयुर्वेद में दाद को दद्रु कहा जाता है, जो कफ-पित्त और रक्त दुष्टि से होता है। विरुद्ध आहार, ज़्यादा नमकीन-खट्टा-खमीर वाला, दिन में सोना और अस्वच्छता इसके कारण माने जाते हैं। उपचार में बाहरी स्वच्छता के साथ अंदर से रक्त शोधन और ज़रूरत हो तो शोधन (पंचकर्म) महत्वपूर्ण है।
व्यावहारिक उपाय
- नहाने के बाद शरीर, खासकर जोड़ों और जांघ के हिस्से को पूरी तरह सुखाएं।
- सूती, ढीले कपड़े; रोज़ बदलें।
- कपड़े, तौलिया, चादर गर्म पानी में धोकर धूप में सुखाएं।
- घर में दूसरों को लक्षण हों तो उनका भी इलाज।
- खुजलाएं नहीं; स्टेरॉयड वाली क्रीम खुद न लगाएं।
आहार
- दूध के साथ खट्टा, नमकीन, मछली जैसे विरुद्ध आहार से बचें।
- मिठाई, खमीर वाला, दही (खासकर रात में), तला हुआ कम।
- कड़वी सब्ज़ियां, मूंग, हल्दी, नीम की कोमल पत्तियां (वैद्य की सलाह से)।
औषधि और पंचकर्म
आयुर्वेद में नीम, हल्दी, चक्रमर्द (पंवाड़), खदिर, मंजिष्ठा, गंधक रसायन जैसे द्रव्य दद्रु में उपयोगी माने जाते हैं। बार-बार होने वाले दाद में वैद्य विरेचन जैसा शोधन सुझा सकते हैं। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति जांचने के बाद वैद्य तय करेंगे।
कब डॉक्टर को दिखाएं?
- दाद पूरे शरीर पर फैल जाए
- मवाद, बुखार, सूजन
- डायबिटीज़ हो और दाद बार-बार हो
- नाखून या सिर की त्वचा में इन्फेक्शन
संबंधित प्रश्न
दाद की दवा कितने समय लें?
जितना डॉक्टर कहें; अक्सर दाग जाने के बाद भी कुछ सप्ताह।
स्टेरॉयड क्रीम से दाद क्यों बढ़ता है?
यह खुजली दबाती है, पर फंगस को बढ़ने का मौका देती है।
दद्रु क्या है?
आयुर्वेद में गोल, खुजली वाले दाद की स्थिति, जो कफ-पित्त और रक्त की दुष्टि से होती है।
संक्षेप में: दाद बार-बार हो तो अधूरा इलाज, नमी, कपड़ों में रहा फंगस और स्टेरॉयड क्रीम मुख्य कारण होते हैं। पूरा कोर्स, सूखापन, कपड़े गर्म पानी से धोना, विरुद्ध आहार से बचना और आयुर्वेदिक रक्त शोधन मददगार हैं।
आप प्रत्यक्ष या ऑनलाइन सलाह ले सकते हैं।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
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