मेरा प्रश्न चेहरे के मस्सों के बारे में है। कुछ समय पहले मेरे चेहरे पर केवल एक ही मस्सा था। पर अब उसके आसपास चार-पांच और छोटे मस्से उभर आए हैं।
मस्से धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं, इसलिए चिंता होती है कि ऐसे ही चलता रहा तो पूरे चेहरे पर फैल जाएंगे। चेहरा ऐसी जगह है जो सबको दिखती है, इसलिए रूप को लेकर भी मन खराब होता है।
लोग कई घरेलू उपाय बताते हैं: कोई धागा बांधने को कहता है, कोई चूना या किसी खास पत्ते का रस लगाने को, तो कोई इसे खुद काट देने को। पर चेहरे की त्वचा नाज़ुक है, इसलिए दाग न रह जाए, इसकी चिंता है, और कौन सा उपाय सुरक्षित है, यह नहीं पता।
मुझे ये बातें जाननी हैं:
– एक मस्से से आसपास नए मस्से क्यों होते हैं, क्या ये फैलते हैं?
– मस्से होने के कारण क्या हैं?
– चेहरे के मस्सों पर घरेलू उपाय या खुद काटना सुरक्षित है?
– आयुर्वेद में मस्से हटाने के लिए कौन सा इलाज है?
– मस्से हटने के बाद फिर न हों, इसके लिए क्या ध्यान रखें?
– कौन से लक्षण हों तो त्वचा के डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है?
मैं ऐसा उपाय चाहता हूं जो सुरक्षित हो और चेहरे पर कोई दाग न छोड़े। आपका मार्गदर्शन मिलेगा तो मैं गलत घरेलू प्रयोगों से बचकर सही इलाज शुरू कर सकूंगा।
नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
सीधा उत्तर: पति में शुक्राणुओं की कम गति और पत्नी में दो महीने में मासिक (जो अनियमित ओव्यूलेशन बताता है), दोनों पर साथ में काम करने से गर्भ की संभावना बढ़ती है। कोई भी उपाय “सौ प्रतिशत” परिणाम की गारंटी नहीं दे सकता, पर जांच, जीवनशैली सुधार और आयुर्वेदिक वाजीकरण तथा आर्तव देखभाल से कई युवा दंपतियों को अच्छा सुधार मिलता है।
समस्या की समझ
- शुक्राणुओं की गति धूम्रपान, तंबाकू, शराब, गर्मी, इन्फेक्शन, वैरिकोसील या पोषण की कमी से घट सकती है; एक रिपोर्ट से निष्कर्ष न निकालें।
- दो महीने में मासिक अक्सर PCOS या हार्मोन असंतुलन का लक्षण होता है।
- दोनों की उम्र कम है, जो अच्छी बात है।
आयुर्वेद की दृष्टि
आयुर्वेद में गर्भ के लिए ऋतु, क्षेत्र, अंबु और बीज ज़रूरी हैं। शुक्राणुओं की कम गति को शुक्र दुष्टि (वात प्रधान) और अनियमित मासिक को आर्तव दुष्टि (वात-कफ अवरोध) के रूप में समझाया जाता है। उपचार में दोनों के लिए अग्नि सुधार, पुरुष के लिए वाजीकरण और स्त्री के लिए आर्तव शोधन मुख्य है।
पति के लिए
- फिर से सीमेन एनालिसिस (2-5 दिन संयम के बाद); ज़रूरत हो तो यूरोलॉजिस्ट की जांच।
- धूम्रपान, तंबाकू, शराब बंद; गोद में लैपटॉप, गर्म पानी से लंबा स्नान, टाइट अंडरवियर से बचें।
- दूध, घी सीमित मात्रा में, बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज, अनार, आंवला।
पत्नी के लिए
- गायनेकोलॉजिस्ट से सोनोग्राफी और हार्मोन जांच।
- वज़न ज़्यादा हो तो धीरे-धीरे घटाएं; रोज़ चलना, योग।
- चीनी, मैदा, तला हुआ कम; जौ, बाजरा, मूंग, हरी सब्ज़ियां।
औषधि और पंचकर्म
पुरुष के लिए अश्वगंधा, कौंच बीज, गोक्षुर, शतावरी; स्त्री के लिए शतावरी, अशोक, कांचनार, दशमूल जैसे द्रव्य आयुर्वेद में उपयोगी माने जाते हैं। वैद्य की जांच के बाद विरेचन, बस्ति या उत्तरबस्ति जैसी चिकित्सा सुझाई जा सकती है। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति जांचने के बाद वैद्य तय करेंगे। शुक्राणुओं में सुधार दिखने में लगभग तीन महीने लगते हैं।
कब डॉक्टर को दिखाएं?
- अंडकोष में दर्द, गांठ या फूली हुई नसें
- पत्नी को बहुत ज़्यादा रक्तस्राव या तीन महीने से ज़्यादा मासिक न आए
- चेहरे पर ज़्यादा बाल, मुंहासे, तेज़ी से वज़न बढ़ना (PCOS के संकेत)
- एक साल इलाज के बाद भी परिणाम न मिले तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ
संबंधित प्रश्न
शुक्राणुओं की गति बढ़ाई जा सकती है?
कई मामलों में कारण दूर करने और पोषण से सुधार होता है; तीन महीने बाद फिर जांच।
दो महीने में मासिक आए तो गर्भ ठहर सकता है?
हां, पर ओव्यूलेशन कम होने से इलाज द्वारा मासिक नियमित करना उपयोगी है।
सौ प्रतिशत असरदार आयुर्वेदिक दवा है?
कोई भी दवा सौ प्रतिशत गारंटी नहीं दे सकती; परिणाम हर दंपति में अलग होता है।
संक्षेप में: पति में शुक्राणुओं की कम गति और पत्नी में दो महीने में मासिक, दोनों के साथ इलाज से गर्भ की संभावना बढ़ती है। फिर से जांच, धूम्रपान-गर्मी से बचाव, वज़न-आहार सुधार और वैद्य की सलाह से वाजीकरण तथा आर्तव देखभाल उपयोगी हैं।
आप दोनों की रिपोर्ट के साथ प्रत्यक्ष या ऑनलाइन सलाह ले सकते हैं।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
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