मेरी परिचित 23 साल की युवती को मासिक आने के कुछ दिन पहले छाती (स्तन) और पेट में तेज़ दर्द होता है। दर्द के कारण वह काम पर ध्यान नहीं दे पाती और चिड़चिड़ापन आ जाता है। ऐसा हर महीने होता है। यह दर्द किस कारण होता है, और इसका उपाय क्या है? आयुर्वेद में इसके लिए क्या मार्गदर्शन है?
नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
सीधा उत्तर: धूल-धुएं में लगातार रहने से एलर्जी और साइनस बार-बार भड़कते हैं। हां, आयुर्वेद में नाक के लिए नस्य नाम का पंचकर्म है, जो नाक और साइनस की तकलीफ में बहुत उपयोगी माना जाता है। ऑपरेशन के बाद नस्य वैद्य की जांच के बाद ही करें।
समस्या की समझ
एलर्जिक राइनाइटिस में नाक धूल जैसी चीज़ों के प्रति ज़्यादा प्रतिक्रिया देती है। लंबे समय नाक बंद रहे तो साइनस में कफ भरता है और संक्रमण होता है, जिससे पीला कफ, सिर भारी और आंख के पास दर्द होता है। ऑपरेशन से नाक का रास्ता खुलता है, पर एलर्जी की प्रकृति नहीं बदलती।
आयुर्वेद की दृष्टि
आयुर्वेद में इसे प्रतिश्याय (बार-बार सर्दी) और पीनस (पुरानी साइनस समस्या) के अंतर्गत समझाया गया है। कफ और वात मुख्य दोष हैं, और पुराने में पित्त भी (पीला कफ, जलन)। कमज़ोर व्याधिक्षमता (रोग प्रतिरोधक शक्ति) बार-बार भड़कने का कारण बनती है। चरक संहिता कहती है “नासा हि शिरसो द्वारम्”, यानी नाक सिर का द्वार है, और नस्य इसका मुख्य उपचार है।
व्यावहारिक उपाय
- ड्यूटी के समय नाक-मुंह ढकने वाला मास्क या कपड़ा।
- ड्यूटी के बाद नाक में गुनगुने नमकीन पानी से सफाई (जल नेति, सीखने के बाद)।
- दिन में 1-2 बार भाप लेना।
- ठंडा पानी, ठंडे पेय और आइसक्रीम से बचें।
- रोज़ सुबह अनुलोम-विलोम, भ्रामरी।
आहार
- गरम, हल्का भोजन; अदरक, हल्दी, तुलसी, काली मिर्च।
- दही (रात को), केला, ठंडा, तला, मिठाई कम।
औषधि और पंचकर्म
आयुर्वेद में हल्दी, तुलसी, त्रिकटु, सितोपलादि, लक्ष्मीविलास रस, चित्रक हरीतकी जैसे द्रव्य प्रतिश्याय में उपयोगी माने जाते हैं; नस्य के लिए अणु तेल प्रसिद्ध है। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति की जांच के बाद वैद्य तय करेंगे। पेट के पंचकर्म (विरेचन) के साथ नस्य भी कार्यक्रम में जोड़ा जा सकता है, वैद्य क्रम तय करेंगे।
तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएं?
- आंखों के आसपास सूजन, धुंधला दिखना
- तीव्र सिरदर्द, बुखार
- सांस फूलना, सीने में सीटी जैसी आवाज़
- नाक से बार-बार खून
संबंधित प्रश्न
क्या नस्य घर पर कर सकते हैं?
रोज़ का प्रतिमर्श नस्य (1-2 बूंद) वैद्य की सलाह से; औषधीय नस्य क्लिनिक में।
क्या जल नेति सुरक्षित है?
सही तरीके से सीखकर और उबालकर ठंडे किए पानी से करना सामान्यतः सुरक्षित है।
ऑपरेशन के बाद भी साइनस क्यों रहता है?
ऑपरेशन रास्ता खोलता है, पर एलर्जी और कफ की प्रकृति बनी रह सकती है।
संक्षेप में: धूल-धुएं से एलर्जी और साइनस बार-बार भड़कते हैं। आयुर्वेद में नाक के लिए नस्य पंचकर्म उपयोगी है, जो पेट के पंचकर्म के साथ जोड़ा जा सकता है। मास्क, जल नेति, भाप, गरम आहार और प्राणायाम सहायक हैं।
आप पंचकर्म की योजना के लिए प्रत्यक्ष सलाह ले सकते हैं।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
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