Skip to content

सालों पुरानी मुंह की दुर्गंध, दांत साफ कराने पर भी फर्क नहीं (24 वर्ष)

मैं 24 साल का हूं। कई सालों से मेरे मुंह से बहुत दुर्गंध आती है और मुंह चिपचिपा रहता है। दांतों के डॉक्टर से कई बार दांत साफ कराए और कई दवाएं भी लीं, पर कोई फर्क नहीं पड़ा। दुर्गंध न आए इसके लिए मुझे मुंह में लगातार कुछ रखना पड़ता है।

अब शादी की बात चल रही है, और लोगों से मिलते समय मुझे बहुत संकोच और बेचैनी होती है। इस तकलीफ का सही कारण क्या हो सकता है, और आयुर्वेद में इसका सही उपाय क्या है? ज़रूरत हो तो प्रत्यक्ष इलाज के लिए भी तैयार हूं।

admin Changed status to publish

नमस्ते

आपका दिन स्वस्थ रहे !!

डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।

सीधा उत्तर: दांतों की सफाई के बावजूद दुर्गंध रहे, तो उसका कारण जीभ पर जमी परत, मसूड़े, टॉन्सिल, साइनस या पाचन की तकलीफ हो सकता है। आयुर्वेद अक्सर इसे कमज़ोर पाचन (मंदाग्नि) और आम से जोड़ता है। मुंह की पूरी स्वच्छता और पाचन सुधार से ज़्यादातर अच्छा सुधार होता है।

समस्या की समझ

ज़्यादातर दुर्गंध जीभ के पिछले हिस्से की परत और मसूड़ों से आती है। टॉन्सिल में जमने वाले सफेद कण (टॉन्सिल स्टोन), साइनस से गले में उतरता कफ, मुंह सूखना, एसिडिटी या कब्ज़ भी कारण हो सकते हैं।

आयुर्वेद की दृष्टि

अग्नि (पाचन शक्ति) मंद हो तो भोजन ठीक से नहीं पचता और आम (अपक्व, चिपचिपा अवशेष) बनता है। आम कफ के साथ मिलकर मुंह में चिपचिपाहट और दुर्गंध लाता है। आयुर्वेद की दिनचर्या में जीभ साफ करना (जिह्वा निर्लेखन) और गंडूष (तेल या काढ़ा मुंह में भरकर रखना) मुंह के स्वास्थ्य के लिए खास बताए गए हैं।

व्यावहारिक उपाय

  • रोज़ सुबह और रात जीभ को टंग क्लीनर से पीछे तक धीरे से साफ करें।
  • दिन में दो बार ब्रश, और दांतों के बीच फ्लॉस।
  • सुबह तिल के तेल का गंडूष (5-10 मिनट) फिर कुल्ला।
  • पर्याप्त पानी; मुंह सूखने न दें।
  • भूख लगने पर ही खाएं, रात को देर से और भारी भोजन नहीं।

आहार

  • हल्का, गरम, ताज़ा भोजन; खाने के बाद सौंफ या इलायची।
  • ज़्यादा प्याज़-लहसुन, तला, मिठाई, ठंडे पेय, बासी भोजन कम।
  • कब्ज़ हो तो उसका इलाज।

औषधि

त्रिफला (कब्ज़ और पाचन), खदिर के काढ़े से कुल्ला, इरिमेदादि तेल जैसे द्रव्य मुंह के स्वास्थ्य में आयुर्वेद में उपयोगी माने जाते हैं। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति की जांच के बाद वैद्य तय करेंगे।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

  • मसूड़ों से खून, दांत हिलना
  • टॉन्सिल में बार-बार सूजन या सफेद कण
  • नाक से पीला कफ, सिर भारी
  • भोजन निगलने में तकलीफ, वज़न घटना

संबंधित प्रश्न

क्या जीभ साफ करने से दुर्गंध घटती है?

हां, जीभ के पिछले हिस्से की परत दुर्गंध का बड़ा कारण है।

गंडूष क्या है?

तेल या काढ़ा कुछ मिनट मुंह में भरकर रखना और फिर थूक देना; आयुर्वेद की दिनचर्या का हिस्सा।

क्या एसिडिटी से मुंह में दुर्गंध आती है?

हां, एसिडिटी और अपच कुछ लोगों में दुर्गंध का कारण बनते हैं।

संक्षेप में: दांत साफ होने पर भी मुंह में दुर्गंध रहे तो जीभ की परत, मसूड़े, टॉन्सिल, साइनस या कमज़ोर पाचन कारण हो सकते हैं। जीभ की सफाई, तेल का गंडूष, हल्का आहार और पाचन सुधार से सुधार होता है।

आप प्रत्यक्ष या ऑनलाइन सलाह ले सकते हैं।


VN

वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)

आयुर्वेद कंसल्टेंट
Atharva Ayurveda Clinic Logo
अथर्व आयुर्वेद क्लिनिक और पंचकर्म सेंटर
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
📍 क्लिनिक का Location — Google Maps

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है, और यह किसी भी रोग के निदान या चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। कृपया कोई भी उपचार शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह अवश्य लें।
admin Changed status to publish
You are viewing 1 out of 1 answers, click here to view all answers.
Back to top