मेरा प्रश्न पत्नी के अनियमित और लंबे चलने वाले मासिक, और अंडा ठीक से न बनने के बारे में है, जिसके कारण हमें संतान नहीं हो रही।
पत्नी और मैं छह साल से वैवाहिक जीवन में हैं, और मेरी उम्र 35 साल है। इतने सालों से संतान के लिए प्रयास कर रहे हैं, और दवा भी चल रही है, फिर भी अभी तक सफलता नहीं मिली। इस लंबे इंतज़ार से हम दोनों मानसिक रूप से थक गए हैं।
मुख्य परेशानी पत्नी के मासिक की है। उसका मासिक नियमित नहीं आता; दो या ढाई महीने में एक बार आता है। और जब आता है तो पंद्रह से बीस दिन तक चलता रहता है।
गायनेकोलॉजिस्ट की देखरेख में चार साइकिल तक सोनोग्राफी से अंडे की जांच कराई। उसमें दिखा कि अंडा कभी बनता है और कभी बनता ही नहीं। जब बनता है, तो वह छोटा रहता है या फूटता नहीं।
इस स्थिति में हमें ये बातें जाननी हैं:
– मासिक इतना अनियमित और लंबा चलने के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
– अंडा छोटा रहे या न फूटे तो संतान पर क्या असर होता है?
– आगे कौन सी जांच करानी चाहिए?
– आयुर्वेद में मासिक नियमित करने और अंडा सुधारने के लिए कौन सा उपचार है?
– चल रहे इलाज के साथ आयुर्वेद ले सकते हैं?
– आहार और जीवनशैली में क्या बदलाव करें?
हम अभी भी उम्मीद रखते हैं, और सही दिशा में धैर्य से प्रयास जारी रखने को तैयार हैं। आपकी सलाह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहेगी।
नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
सीधा उत्तर: इस उम्र में शरीर अभी बन रहा होता है, और पर्याप्त पौष्टिक आहार, नियमित नींद और हल्के व्यायाम से कई युवतियों का वज़न धीरे-धीरे बढ़ता है। मासिक अनियमित हो, थकान लगे या खाने के बावजूद वज़न न बढ़े, तो जांच ज़रूरी है।
समस्या की समझ
कम वज़न के कारणों में आनुवंशिकता, कम भोजन, भोजन छोड़ना, कम हीमोग्लोबिन, थायरॉइड, कृमि या पढ़ाई का तनाव हो सकता है। कभी-कभी “मोटी हो जाऊंगी” का डर भी कम खाने का कारण बनता है; ऐसा हो तो इस पर खास ध्यान दें।
आयुर्वेद की दृष्टि
आयुर्वेद में ज़्यादा दुबलेपन को कार्श्य कहा जाता है, और इसमें वात बढ़ा होता है। स्त्रियों में रस धातु का पोषण खास महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आर्तव (मासिक) और पूरे शरीर का स्वास्थ्य जुड़ा है। उपचार में अग्नि सुधार और बृंहण मुख्य हैं।
घरेलू और व्यावहारिक उपाय
- सुबह का नाश्ता कभी न छोड़ें; दिन में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं।
- रात को सोने से पहले गर्म दूध, खजूर या अंजीर के साथ (पचे तो)।
- केला, शकरकंद, आलू, चीकू, आम (मौसम के अनुसार)।
- रोज़ थोड़ा घी दाल-चावल या रोटी के साथ।
- सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, वज्रासन (भोजन के बाद) जैसा हल्का व्यायाम; भूख बढ़ती है।
- 8 घंटे नींद, मोबाइल पर रात जागरण नहीं।
आहार में किससे बचें
- जंक फूड, ठंडे पेय, ज़्यादा चाय-कॉफी (भूख मारते हैं)।
औषधि
आयुर्वेद में शतावरी, अश्वगंधा जैसे बृंहण द्रव्य और भूख के लिए दीपन औषधियां उपयोगी मानी जाती हैं। नियमित अभ्यंग भी फायदेमंद है। सही दवा, मात्रा और समय आपकी स्थिति जांचने के बाद वैद्य तय करेंगे। इंटरनेट के वज़न बढ़ाने वाले पाउडर खुद न लें।
कब डॉक्टर को दिखाएं?
- मासिक बहुत अनियमित या बंद
- चक्कर, बहुत थकान, सांस फूलना
- खाने के बावजूद वज़न घटना
- भोजन को लेकर लगातार डर, जानबूझकर कम खाना या खाने के बाद उल्टी करना
संबंधित प्रश्न
कम वज़न से मासिक पर असर होता है?
हां, बहुत कम वज़न से मासिक अनियमित या बंद हो सकता है।
वज़न बढ़ाने के लिए रात को क्या खाएं?
हल्का भोजन और पचे तो गर्म दूध; भारी तला हुआ नहीं।
शतावरी स्त्रियों के लिए क्यों उपयोगी है?
आयुर्वेद में यह स्त्रियों के लिए पोषक रसायन मानी जाती है; वैद्य की सलाह से लें।
संक्षेप में: किशोर अवस्था में कम वज़न ज़्यादातर कम या अनियमित भोजन से होता है। दिन में 5-6 बार पौष्टिक भोजन, घी, दूध, फल, नींद और हल्के व्यायाम से वज़न बढ़ता है; मासिक अनियमित हो या बहुत थकान हो तो जांच कराएं।
आप प्रत्यक्ष या ऑनलाइन सलाह ले सकते हैं।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
📍 क्लिनिक का Location — Google Maps