मेरी उम्र 23 वर्ष है और छह साल से समस्या है। कुछ खाऊँ या न खाऊँ, 24 घंटे मुँह से गैस निकलती रहती है। खाते समय गले में भोजन अटक जाता है और गले में कुछ चुभता-सा लगता है। दिन में तीन-चार बार टॉयलेट जाना पड़ता है। गैस के कारण पानी भी नहीं पी पाता। रोज़ एसिडिटी होती है। गले में अंदर सूजन जैसा दर्द होता है। हमेशा सर्दी रहती है। छह साल में 10-12 डॉक्टरों से इलाज करवा चुका हूँ, कोई फ़र्क नहीं; उल्टा समस्या बढ़ी है। अब तो पानी पीने में भी तकलीफ़ होती है। क्या करूँ, बताएँ।
नमस्ते
आपका दिन स्वस्थ रहे !!
डॉ. निकुल पटेल द्वारा संचालित आयुर्वेद के स्वास्थ्य जगत में आपका स्वागत है।
आपको बहुत सारी तकलीफ़ें हैं। खासकर वात, पित्त और कफ – तीनों दोष एक साथ आपके शरीर में बिगड़े हुए हैं। ऐसे समय कोई एक रामबाण इलाज या गोली सब कुछ एक साथ ठीक कर दे, यह संभव नहीं।
10-12 डॉक्टर बदलने के बावजूद आप छह साल से परेशान हैं, लेकिन आपकी तकलीफ़ मुख्यतः पाचन से जुड़ी है। यह उदान वायु और व्यान वायु के प्रकोप से शुरू हुई, और एलोपैथी दवाओं के दुष्प्रभाव से एसिडिटी भी जुड़ गई हो सकती है।
सर्दी और गले का दर्द खान-पान में ध्यान न रखने, ऋतु बदलने, ठंडी हवा या ठंडे पानी के कारण हो सकता है।
ऐसी स्थिति में नियमित जाँच करके हर पंद्रह दिन या महीने में दवा बदलते हुए एक-एक लक्षण को काबू करके रोग ठीक करना होगा। मेरा आग्रह है कि पास के किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क कर उनकी सलाह अनुसार दवा शुरू करें और ज़रूरत पड़ने पर पंचकर्म भी करवाएँ। इस रोग के लिए धैर्यपूर्वक लगातार प्रयास चाहिए – डॉक्टर बदलने से रोग नहीं मिटेगा। चूँकि भोजन अटकता है और पानी निगलना भी कठिन है, कृपया बिना देर किए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट/ENT डॉक्टर से भी जाँच करवाएँ।
तब तक निम्न दवाएँ शुरू कर सकते हैं:
- अविपत्तिकर चूर्ण 1 चम्मच दिन में तीन बार पानी के साथ
- छर्दिरिपु चूर्ण आधा चम्मच सुबह-शाम शहद के साथ चाटें
- तुलसी और अडूसा (वासा) का रस शहद मिलाकर सुबह-शाम नियमित पिएँ
- हल्दी और नमक वाले गर्म पानी से कुल्ला करें
- रात को सोते समय हल्दी वाला दूध पिएँ
आहार:
- अधिक भोजन न करें; अभी खिचड़ी, दाल-चावल जैसा हल्का भोजन लें और शांति से धीरे-धीरे खाएँ
- बासी भोजन बिल्कुल न लें
- ब्रेड, बिस्किट, पाव जैसी मैदे की चीज़ें बंद करें
- अचार और खमीर वाली चीज़ें बिल्कुल न लें
- ठंडा पानी और फ्रिज में रखी सभी चीज़ें बंद करें
आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा भी लाभदायक होगी:
- वमन कर्म
- विरेचन कर्म
- बस्ति कर्म
- शिरोधारा
- कवल और गंडूष
ऐसे समय में नकारात्मक विचारों से दूर रहकर हमेशा सकारात्मक सोचें।
रोज़ सुबह टहलने जाएँ और योग, प्राणायाम तथा ध्यान करें तो जल्दी लाभ होगा।
बेहतर परिणाम के लिए नियमित रूप से करें:
- पश्चिमोत्तानासन
- चक्रासन
- पवनमुक्तासन
- प्राणायाम
नोट:
यहाँ दी गई सलाह सुरक्षा और हर जगह उपलब्धता के आधार पर दी गई है। हालाँकि, परिणाम दवा बनाने वाली कंपनी की गुणवत्ता पर निर्भर कर सकता है।
हमारे पास अच्छी गुणवत्ता की दवाएँ भी उपलब्ध हैं। हम दवाएँ गैर-व्यावसायिक आधार पर बनाते हैं और केवल अपने क्लिनिक से ही भेजते हैं। कोई भी व्यक्ति हमारे यहाँ से शुद्ध दवाएँ ले जा सकता है या कूरियर द्वारा दुनिया भर में मँगवा सकता है (कूरियर शुल्क अलग)। ऑनलाइन परामर्श द्वारा दवा पाने के लिए ईमेल या व्हाट्सएप मैसेज करें।
वैद्य निकुल पटेल (बी.ए.एम.एस.)
307, तीसरी मंजिल, शालिन कॉम्प्लेक्स, फरकी लस्सी के ऊपर, कृष्णबाग चार रास्ता, मणिनगर, अहमदाबाद – 380008
समय: सुबह 10:00 से 1:00 और दोपहर 3:00 से 6:30 | शनि–रवि: बंद
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